6 September 2015

आरटीआई लिखने का तरीका


RTI मलतब सूचना का अधिकार - ये कानून
हमारे देश मे 2005 मे लागू हुआ| जिस का उपयोग
कर के आप सरकार और
किसी भी विभाग से
सूचना मांग सकते है!
आम तौर पर
लोगो को इतना ही पता होता है| परंतु आज मैं
आप को इस के बारे मे कुछ ओर रोचक
जानकारी देते है -
1)आरटीआई से आप सरकार से कोई
भी सवाल पूछ
कर सूचना ले सकते है
2)आरटीआई से आप सरकार के
किसी भी दस्तावेज़
की जांच कर सकते है
3)आरटीआई से आप दस्तावेज़ या Document
की प्रमाणित Copy ले सकते है
4)आरटीआई से आप सरकारी काम काज
मे इस्तमल
सामग्री का नमूना ले सकते है
5)आरटीआई से आप
किसी भी कामकाज
का निरीक्षण कर सकते है
कुछ लोगो का सवाल कि -"आरटीआई मे कौन- कौन
सी धारा हमारे काम की है "
तो उस
का जवाब -
**धारा 6 (1) - आरटीआई का application
लिखने का धारा है

**धारा 6 (3) - अगर आप की application गलत
विभाग मे चली गयी है तो गलत विभाग
इस
को 6 (3) धारा के अंतर्गत सही विभाग मे 5
दिन के अंदर भेज देगा

**धारा 7(5) - इस धारा के अनुसार BPL कार्ड
वालों को कोई आरटीआई शुल्क
नही देना होता

**धारा 7 (6) - इस धारा के अनुसार अगर
आरटीआई का जवाब 30 दिन मे
नही आता है
तो सूचना फ्री मे दी जाएगी

**धारा 18 - अगर कोई अधिकारी जवाब
नही देता तो उस की शिकायत
सूचना अधिकारी को दी जाए

**धारा 8 - इस के अनुसार वो सूचना आरटीआई मे
नही दी जाएगी जो देश
की अखंडता और
सुरक्षा के लिए खतरा हो या विभाग
की आंतरिक जांच को प्रभावित करती हो

**धारा 19 (1) - अगर आप
की आरटीआई
का जवाब 30 दिन मे नही आता है तो इस
धारा के अनुसार आप प्रथम अपील
अधिकारी को प्रथम अपील कर सकते
हो

**धारा 19 (3) - अगर आप की प्रथम
अपील
का भी जवाब नही आता है तो आप
इस
धारा की मदद से 90 दिन के अंदर 2nd
अपील
अधिकारी को अपील कर सकते हो

.
ques--आरटीआई
कैसे लिखे?
-
इस के लिए आप एक साधा पेपर ले और उस मे1 इंच
की कोने से जगह छोड़े और नीचे दिए
गए प्रारूप मे
अपने आरटीआई लिख ले
.............................................
.............................
.............................................
.............................
सूचना का अधिकार 2005 की धारा 6(1) और
6(3) के अंतर्गत आवेदन
सेवा मे
(अधिकारी का पद)/ जन सूचना अधिकारी
विभाग का नाम
विषय - आरटीआई act 2005 के
अंतर्गत ...............
... से संबधित सूचनाए
1- अपने सवाल यहाँ लिखे
2-
3
4
मैं आवेदन फीस के रूपमें 10रूका पोस्टल
ऑर्डर ........ संख्या अलग से जमा कर रहा /
रही हूं।
या
मैं बी.पी.एल. कार्ड
धारी हूं इसलिए सभी देय
शुल्कों से मुक्त हूं। मेरा बी.पी.एल.
कार्ड
नं..............है।
यदि मांगी गई सूचना आपके विभाग/
कार्यालय से सम्बंधित
नहीं हो तो सूचना का अधिकार अधिनियम,
2005 की धारा 6 (3) का संज्ञान लेते हुए
मेरा आवेदन सम्बंधित लोक
सूचना अधिकारी को पांच दिनों के
समयाविध् के अन्तर्गत हस्तान्तरित करें। साथ
ही अधिनियम के प्रावधानों के तहत
सूचना उपलब्ध् कराते समय प्रथम अपील
अधिकारी का नाम व पता अवश्य बतायें।
भवदीय
नाम:
पता:
फोन नं:
.............................................
.............................
.............................................
.............................
ये सब लिखने के बाद अपने Sign कर दे
अब मित्रो केंद्र से सूचना मांगने के लिए आप 10
रुदेते है और एक पेपर की कॉपी मांगने
के 2 रुदेते है
और हर राज्य का आरटीआई शुल्क अगल अलग
है
जिस का पता आप कर सकते हेl

5 September 2015

જીવન છે એટલે સમસ્યાઓ અને પ્રશ્નો રહેવાના જ છે.

એક શિક્ષક પીરીયડ લેવા માટે વર્ગખંડમાં દાખલ થયા. શિક્ષકને જોતા જ વિદ્યાર્થીઓના ચહેરા ખીલી ઉઠ્યા કારણકે એ શિક્ષક વિદ્યાર્થીઓના સૌથી પ્રિય શિક્ષક હતા. શિક્ષકના હાથમાં એક પાણી ભરેલો ગ્લાસ હતો. આ ગ્લાસ વિદ્યાર્થીઓને બતાવીને પુછ્યુ," આ ગ્લાસનો વજન કેટલો હશે ? "બધા વિદ્યાર્થીઓએ જુદા-જુદા જવાબો આપ્યા. શિક્ષકે બીજો પ્રશ્ન પુછ્યો, " આ ગ્લાસને હું થોડી મીનીટ મારા હાથમાં પકડી રાખુ તો શું થાય ? " એક વિદ્યાર્થીએ જવાબ આપ્યો, " સર, આટલા નાના ગ્લાસને થોડીવાર પકડી રાખવાથી કંઇ જ ન થાય."સાહેબે આગળનો સવાલ પુછ્યો, " હું આ ગ્લાસને થોડા કલાક માટે પકડી રાખુ તો ? " બીજા એક વિદ્યાર્થીએ જવાબ આપ્યો, " સર, તો પછી તમારા હાથમાં દુ:ખાવો શરુ થાય." શિક્ષકે વિદ્યાર્થીઓ સાથેનો વાર્તાલાપ આગળ ચલાવતા કહ્યુ, " પણ, હું આ ગ્લાસને આખો દિવસ પકડી રાખુ તો ? " એક છોકરો ઉભો થઇને બોલ્યો, " સર તો પછી તમને દવાખાનેદાખલ કરવા પડે." છોકરાનો જવાબ સાંભળીને આખો ક્લાસ હસી પડ્યો.શિક્ષકે કહ્યુ, " આ સમય દરમિયાન ગ્લાસના વજનમાં કોઇ વધારો થાય ?" એક છોકરાએ બહુ સરસ જવાબ આપ્યો , "ના સર, ગ્લાસનું વજન ન વધે પણ એને પકડી રાખવાથી હાથનો દુખાવો વધે.આ દુ:ખાવામાંથી મુક્ત થવુ હોય તો ગ્લાસને હાથમાં પકડી રાખવાના બદલે ટેબલ પર મુકી દેવાય"શિક્ષકે વિદ્યાર્થીઓને કહ્યુ, " દોસ્તો, જીવનમાં આવતી સમસ્યાઓ આ ગ્લાસ જેવી જ છે જો એને પકડી રાખીએ તો દુ:ખાવો સતત વધતો જાય અને જો એને નીચે મુકતા શીખીએ તો રાહત થાય."મિત્રો, જીવન છે એટલે સમસ્યાઓ અને પ્રશ્નો રહેવાના જ છે. આ સમસ્યાને થોડો સમય પકડી રાખીએ ત્યાં સુધી વાંધો નહી આવે પણ જો યોગ્ય સમયે નીચે મુકતા નહી આવડે તો દુ:ખી થવા સીવાય બીજો કોઇ ઉપાય નથી

भाग्यशाली हैं वो जिनके घर होती हैं बेटियाँ.

राजा दशरथ जब अपने चारों बेटों की बारात लेकर राजा जनक के द्वार पर पहुँचे तो राजा जनक ने सम्मानपूर्वक बारात का स्वागत किया |
तभी दशरथ जी ने आगे बढ़कर जनक जी के चरण छू लिए, चौंककर जनक जी ने दशरथ जी को थाम लिया और कहा " महाराज आप बड़े हैं वरपक्षवाले हैं, ये उल्टी गंगा कैसे बहा रहे हैं? "
इस पर दशरथ जी ने बड़ी सुंदर बात कही.., " महाराज आप दाता हैं कन्यादान कर रहे हैं, मैं तो याचक हूँ, आपके द्वार कन्या लेने आया हूँ | अब आप ही बताएँ कि दाता और याचक दोनों में कौन बड़ा है?"
यह सुनकर जनक जी के नेत्रों से अश्रुधारा बह निकली |
भाग्यशाली हैं वो जिनके घर होती हैं बेटियाँ..

हर बेटी के भाग्य में पिता होता है लकिन हर पिता के भाग्य में बेटी नहीं होती है।

કોઈ શિક્ષકે પુણ્ય કમાવવા માટે ક્યાંય જવું નહી પડે.

' દાનમાં શ્રેષ્ઠ દાન એવા “વિદ્યાદાન” જેવા પુણ્યનું કામ કરવાનું પણ વળતર મળે તેવા શિક્ષક્ના વ્યવસાયનું મૂલ્ય સમજીએ.

       એક નાનું સર્કસ. રોજ ત્રણ ખેલ ચાલે, ઘણા જુદા-જુદા કરતબ બતાવે. ત્યાં એક બબલુભાઈ. ૧૦ મિનિટમાં ૪૦ લાડવા ખાવાનું કરતબ બતાવે, સવારના નવ વાગ્યાના શોમાં એનાઉન્સમેન્ટ થયું, “હવે બબલુભાઈ આપણને ૧૦ મિનિટમાં ૪૦ લાડવા ખાવાનું કરતબ બતાવશે” બબલુભાઈએ ૧૦ મિનિટમાં ૪૦ લાડવા ખાવાનું કરતબ બતાવ્યું. બાર વાગ્યાના શોમાં એનાઉન્સમેન્ટ થયું, “હવે બબલુભાઈ આપણને ૧૦ મિનિટમાં ૪૦ લાડવા ખાવાનું કરતબ બતાવશે” બબલુભાઈએ ૧૦ મિનિટમાં ૪૦ લાડવા ખાવાનું કરતબ બતાવ્યું. પણ ત્રણ વાગ્યે જ્યારે એનાઉન્સમેન્ટ થયું ત્યારે બધા શોધે કે બબલુભાઈ ક્યાં ? બબલુભાઈ પડદા પાછળ ટીફીન ખોલીને ખાવા બેઠા હતા. સર્કસના માલિકે કહ્યું કે “ જલદી ચાલ બબલુ, હવે તારા કરતબનો વારો છે. ત્યારે બબલુભાઈ કહે “આંખો દિવસ કામ જ કરાવ્યા કરશો કે પછી શાંતિથી ખાવા પણ દેશો ?????

                              આપણે પણ આવા બબલુભાઈ જેવા જ છીએ અને આપણા વ્યવસાયનું પણ આવું જ છે, જેમ બબલુભાઈ ૪૦ લાડવા ખાવાને પોતાનો વ્યવસાય સમજે છે તેમ આપણે પણ બાળકોને ભણાવવું તેને આપણો વ્યવસાય તરીકે જ માની લીધો છે, પરંતુ જો બબલુભાઈ જે દિવસે વિચારશે કે ૪૦ લાડવા ખાવાના કરતબમાં લોકોના મનોરંજનની સાથે-સાથે પોતાની ભૂખ પણ સંતોષાય છે,તે દિવસથી તેને ટિફિનની જરૂર નહી રહે, આપણે જે દિવસે પણ શિક્ષક્ના વ્યવસાયની ઉપર જઈને વિચારીશું કે આપણને બાળકોને સુશિક્ષિત અને સમાજ-ઉપયોગી બાનાવવા માટેના કામના વળતરમાં આપણને પગારની સાથે-સાથે “વિદ્યાદાન” કર્યાનું પુણ્ય પણ મળે છે તે દિવસથી આપણે શિક્ષણ આપવું તે આપણો કર્મ નહી ધર્મ બની જશે. પછી કોઈ શિક્ષકે પુણ્ય કમાવવા માટે ક્યાંય જવું નહી પડે. અને પછી જ ખરા અર્થમાં બાળકો “બાળ-દેવો” , શાળા “સ્વર્ગ” અને શિક્ષકને “ગુરૂ” સમાન કહેવાશે.

4 September 2015

शिक्षक दिवस के मौके पर छात्रों के मजेदार सवालों और प्रधानमंत्री मोदी के जवाब

शिक्षक दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जहां बच्चों को संबोधित किया, वहीं दिल्ली और दूसरे राज्यों के छात्रों के सवालों के जवाब भी दिए। उनसे पूछे गए सभी सवाल और उसके जवाब....

1.सबसे कम उम्र में ऐवरेस्ट पर चढ़ने वाली मलावात पूर्णा (निजामाबाद, तेलंगाना) का सवाल: आपके जीवन पर किसका प्रभाव सबसे ज्यादा रहा है?

नरेंद्र मोदी: जीवन किसी एक व्यक्ति के कारण नहीं बनता है। अगर हम अच्छी चीजों को ग्रहण करने वाले होते हैं, तो हर जगह सीखते हैं। कई बार सफर के दौरान रेल के डिब्बे में भी कुछ न कुछ सीखते हैं। मेरे जीवन में भी शिक्षकों, मां और कई लोगों को प्रभाव रहा। बाद में स्वामी विवेकानंद को पढ़ने का मौका मिला। मुझे लगता है कि उनका प्रभाव काफी अधिक रहा।

2.इंग्लिश ओलिंपियाड में टॉप करने वाली शैली किपजेन ( मणिपुर) का सवाल: सफल नेता बनने के लिए क्या गुण हो? राजनीति में आने के लिए क्या करूं?

नरेंद्र मोदी: दुर्भाग्य से राजनीति आज बदनाम हो गई है। राजनीति में भी प्रतिभाशाली लोगों की जरूरत है। इसके लिए लीडरशिप का गुण होना चाहिए। यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि हम नेता क्यों बनना चाहते हैं। सिर्फ चुनाव लड़ने के लिए या समाज में बदलाव लाने के लिए।

3.जूनियर मास्टरशेफ का खिताब जीतने वाले सार्थक भारद्वाज (देहरादून, उत्तराखंड) का सवाल: डिजिटल इंडिया बहुत अच्छा कार्यक्रम है, लेकिन भारत में कई जगहों पर बिजली तक नहीं है, यह कैसे सफल होगा?

नरेंद्र मोदी: हमारे देश में 18 हजार गावों में बिजली नहीं है। मैं इस दिशा में काम कर रहा हूं और अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इन गांवों में एक हजार दिनों में बिजली चाहिए। दूसरी बात, डिजिटल क्रियाकलापों के लिए बिजली जरूरी नहीं है। सोलर एनर्जी विकल्प है और मोबाइल से भी यह भी संभव है। इसलिए बिजली कभी रुकावट नहीं बनेगी। मेरी कोशिश है कि 2022 तक सभी घरों को 24 घंटे बिजली मिले।

4.स्पेशल ओलिंपिक में गोल्ड मेडल जीतने वाली सोनिया येलप्पा पाटिल (पणजी, गोवा) का सवाल: आपको कौन-सा खेल पसंद है?

नरेंद्र मोदी: लड़कियां खेल में आगे बढ़ती हैं, तो इसमें मां का खास योगदान होता है। मैं उनके टीचर को विशेष रूप से बधाई देता हूं, जिन्होंने सोनिया को आगे बढ़ाना के लिए कितना कुछ किया होगा। राजनीति वाले क्या खेलते हैं सबको पता है। बचपन में कबड्डी, खो-खो खेलता था और गांव में होने की वजह से तलाब में कपड़े धोने जाता था तो तैरना आ गया और बाद में तैराकी में आनंद आने लगा।

5.वेस्ट मैनेजमेंट पर ऐप बनाने वाली बेंगलुरु की 5 लड़कियों का पेंटागन ग्रुप का सवाल: स्वच्छ भारत की क्या चुनौतियां हैं?

नरेंद्र मोदी: स्वच्छ भारत अभियान हमारे स्वभाव से जुड़ा है। यह एक ऐसा कार्यक्रम है, जिस पर किसी ने सवाल नहीं उठाया है। इस अभियान का सबने समर्थन किया है। वेस्ट मैनेजमेंट आज बहुत बड़ा उद्योग बन रहा है और हम इसे लेकर कई योजनाएं चला रहे हैं।

6.विज्ञान कांग्रेस में असाधारण माने गए अनमोल काबरा (पटना, बिहार) का सवाल: तीन घंटे की प्रतियोगी परीक्षा में टॉप करना आज की शिक्षा व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य बन गया है। आप इस पर क्या कहना चाहते हैं?

नरेंद्र मोदी: यह बात सही है कि हमारे यहां मां-बाप का एक स्वभाव होता है कि जो वे खुद न कर पाए चाहते हैं कि उनके बच्चे वह हासिल करें। मैं इस संबंध में एक छोटा-सा बदलाव लाने की कोशिश कर रहा हूं। मैंने शिक्षा विभाग से कहा है कि स्कूलों को चरित्र प्रमाण पत्र के बजाय अभिरुचि प्रमाण पत्र देना चाहिए, जिसे हर तीन महीने अपडेट किया जाना चाहिए। इसे छात्र के दोस्तों और शिक्षकों आदि द्वारा लगातार दिए गए फीडबैक के आधार पर तैयार किया जाना चाहिए।

7.क्लाउड कम्प्यूटिंग में सराहनीय काम करने वाली के. विलासिनी ( तमिलनाडु) का सवाल: मैं देश सेवा के लिए क्या करूं?

नरेंद्र मोदी: तुम जो अभी कर रही हो, वह भी देश की सेवा है। लोग मानते हैं कि देश की सेवा सिर्फ फौज और राजनीति जैसे क्षेत्रों में जाकर की जा सकती है। आप खाना बर्बाद नहीं करते हैं, तो यह भी देश सेवा है। करोड़ों लोगों द्वारा किए जा रहे छोटे-छोटे काम भी देश सेवा ह